कमलेश भट्ट कमल का एक महत्वपूर्ण लेख " हाइकु कविता की अभिव्यक्ति सामर्थ्य " साहित्य अकादमी की प्रतिष्ठित पत्रिका " समकालीन भारतीय साहित्य " (मार्च-अप्रैल-2012) अंक में प्रकाशित हुआ है।
Thursday, May 31, 2012
Sunday, December 04, 2011
हाइकु सप्ताह कानपुर में
हाइकु सप्ताह २०११ के अन्तर्गत कानपुर में कमलेश भट्ट कमल के आवास पर हाइकु गोष्ठी का आयोजन किया गया। कानपुर में हाइकु पर पहली बार कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम के संयोजक कमलेशभट्ट कमल ने हाइकु कविता के सन्दर्भ में पूरी जानकारी देते हुए बताया कि हाइकु का परिचय गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कराया तथा अज्ञेय जी ने इसे भारत में थोड़ी और गति दी। प्रो० सत्यभूषण वर्मा ने हिन्दी हाइकु का भरपूर प्रचार किया तथा कमलेश भट्ट कमल, भगवतशरण अग्रवाल एवं डा० जगदीश व्योम ने हाइकु को हाइकु दर्पण के माध्यम से हिन्दी साहित्यकारों तक पहुँचाने में बड़ा योगदान दिया है। इस अवसर पर कमलेश भट्ट कमल ने हाइकु - 2009 से एवं अन्य हाइकु की पुस्तकों से हाइकु पाठ किया, जिनमें विशेष रूप से- डा० भगवतशरण अग्रवाल, ओमप्रकाश यती, डा० जगदीश व्योम, रमाकान्त श्रीवास्तव, नलिनीकान्त, नवलकिशोर नवल, पूर्णिमा वर्मन और त्रिलोकसिंह ठकुरेला की प्रतिनिधि हाइकु कविताओं का पाठ किया।
हाइकु कविताओं के पाठ के उपरान्त विनोदकुमार श्रीवास्तव, शैलेन्द्र शर्मा, राजेन्द्र तिवारी, जयराम जय, डा० कमलेश द्विवेदी, अमरीक सिंह दीप, डा० खान हफीज, सत्यप्रकाश शर्मा ने अपनी अपनी कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर दिल्ली से डा० जगदीश व्योम ने आनलाइन रहकर अपनी हाइकु कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अन्त में कमलेश भट्ट कमल ने आभार व्यक्त किया। शीघ्र ही नोएडा स्थित कलामित्र में हाइकु की कार्शाला के आयोजन का प्रस्ताव रखा गया जिसे शीघ्र ही कार्यान्वित किया जायेगा।
हाइकु कविताओं के पाठ के उपरान्त विनोदकुमार श्रीवास्तव, शैलेन्द्र शर्मा, राजेन्द्र तिवारी, जयराम जय, डा० कमलेश द्विवेदी, अमरीक सिंह दीप, डा० खान हफीज, सत्यप्रकाश शर्मा ने अपनी अपनी कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर दिल्ली से डा० जगदीश व्योम ने आनलाइन रहकर अपनी हाइकु कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अन्त में कमलेश भट्ट कमल ने आभार व्यक्त किया। शीघ्र ही नोएडा स्थित कलामित्र में हाइकु की कार्शाला के आयोजन का प्रस्ताव रखा गया जिसे शीघ्र ही कार्यान्वित किया जायेगा।
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हाइकु सप्ताह 2011
आज कलामित्र में जाने का अवसर मिला। कलामित्र एक ऐसी संस्था का नाम है जहाँ कलाकारों, साहित्यकारों, नाटककारों, चित्रकारों, संगीतकारों, कवियों आदि सभी को एक साथ मिल बैठकर अपने अपने कला क्षेत्र की विविध गतिविधियों पर चर्चा करने के लिए उचित स्थान एवं चर्चा के अनुरूप वातावरण प्रदान कराता है। नोएडा के सेक्टर 58 में ए-21 में स्थित कलामित्र की स्थापना श्री आर.एन. बाथम ने की। यहाँ कलाकृतियों के प्रदर्शन एवं साहित्यिक विचार विमर्श के लिए बहुत अच्छा वातावरण है। आजकल यहाँ कलाकृतियों की एक सुन्दर गैलरी सजी हुई है जिसे कलाप्रेमी 11 दिसम्बर तक प्रातः 10 बजे से सायं 07 बजे तक देख सकते हैं।
आज डा० जगदीश व्योम ने हाइकु कविता पर यहाँ चर्चा की। हाइकु क्या है ? हाइकु की आज क्या स्थिति है? हाइकु और चित्रकला का पारस्परिक सम्बंध आदि विषयों पर चर्चा हुई। शीघ्र ही हाइकु कार्यशाला का आयोजन यहाँ किया जाएगा।
आज डा० जगदीश व्योम ने हाइकु कविता पर यहाँ चर्चा की। हाइकु क्या है ? हाइकु की आज क्या स्थिति है? हाइकु और चित्रकला का पारस्परिक सम्बंध आदि विषयों पर चर्चा हुई। शीघ्र ही हाइकु कार्यशाला का आयोजन यहाँ किया जाएगा।
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Wednesday, September 21, 2011
हाइकु दिवस 2008 कुछ लिंक
हाइकु दिवस समारोह दिनांक ०४ दिसम्बर २००८ को साहित्य अकादमी दिल्ली में मनाया गया। जिन पत्र-पत्रिकाओं एवं जालघरों के संपादकों ने हाइकु दिवस समाचार को प्रकाशित किया है, हम उनके आभारी हैं। यहाँ हाइकु पाठकों की सुविधा के लिए लिंक दिए जा रहे हैं जिससे सम्बधित समाचार को यहाँ देखा जा सकता है।
-व्योम
* कविता कोश
* अनुभूति/अभिव्यक्ति पर समाचार
* साहित्य कुंज में gggggg
-व्योम
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Tuesday, September 20, 2011
Wednesday, June 01, 2011
गति नहीं, गहराई की कविता है हाइकू
सहारनपुर। देश के जाने-माने गजलकार व हाइकु आंदोलन के ध्वजवाहक कमलेश भट्ट कमल का कहना है कि जापानी शैली की कविता हाइकू गति की नहीं, गहराई के लिए जानी जाती है। जब तक हाइकु कविता को रचनाकार साधना के स्तर तक नहीं ले जाएंगे तब तक वह उबाऊ ही रहेगी।
गजलकार कमेलश भट्ट यहां अंबाला रोड स्थित स्वामी रामतीर्थ केंद्र में नौ हाइकुकारों के संकलन 'इंद्रधनुष' पर साहित्यिक संस्था 'समन्वय' द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में अपना विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हाइकु का चलन देश में तेजी से बढ़ा और आज गोपालदास नीरज जैसे गीतकार भी हाइकु लिख रहे हैं। पिछले तीन वर्ष में सहारनपुर एक बड़े हाइकु केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। यहां शारजाह से पूर्णिमा बर्मन, डा. अंजलि देवधर, डा. बलदेव वंशी, डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, डा. जगदीश व्योम जैसे बड़े-बड़े हाइकूकार आ चुके हैं। यहां के लगभग एक दर्जन रचनाकर हाइकु पर ध्यान दे रहे हैं। हाइकु पर गोष्ठी व काव्य पाठ आयोजन के लिए समन्वय की सराहना की। मुख्य वक्ता व वेब पत्रिका, 'हाइकु दर्पण' के संपादक डा. जगदीश व्योम ने हाइकु के इतिहास पर विस्तार से चर्चा करते हुए सुझाव दिया कि यदि हाइकु पर जापान की तरह कार्यशाला व हाइकु यात्राएं आयोजित की जाएं तो बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि आर.पी. शुक्ल ने सहारनपुर से अपना पहला हाइकु संग्रह प्रकाशित कराकर हाइकु मानचित्र पर सहारनपुर को नई पहचान दी है।
निवर्तमान मंडलायुक्त व इंद्रधनुष के संपादक आर.पी. शुक्ल ने कहा कि उनका प्रयास रहा है कि सहारनपुर के समस्त हाइकूकारों का संकलन सामने आए, लेकिन इसमें केवल नौ हाइकूकार ही शामिल हो सके। इस अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार डाक्टर सुरेंद्र सिंघल ने कहा कि हाइकु अलग विधा है। इसके अलावा कवि कृष्ण शलभ, डा. वीरेंद्र आजम, हरी राम पथिक, कमलेश भट्ट कमल, डा. सपना सिंह, डा. आर.के. मैनी ने हाइकु की चुनिंदा पंक्तियों को सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी। संग्रह में प्रशासनिक अधिकारी रजनीकांत के भी हाइकु शामिल हैं। कार्यक्रम में अखिलेश मिश्र, सर्वेश प्रभाकर, आसिम पीरजादा, आसिफ शम्सी, अरिदमन सिंह, रमेश छबीला, के.के. गर्ग, डा. इरशाद सागर, वेद प्रकाश पोपली, चंद्रभान सहित शहर के अनेक साहित्यकार मौजूद थे।
- ( जागरण से साभार )
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सहारनपुर २९ मई २०११
Saturday, May 07, 2011
हाइकु दिवस समारोह-2006
गाजियाबाद : ४ दिसम्बर २००६ : विश्व की सबसे छोटी कविता के रूप में चर्चित हाइकु पर केन्द्रित हाइकु दिवस समारोह का आयोजन आज स्थानीय गान्धर्व संगीत महाविद्यालय में महानगर के प्रमुख साहित्यकारों एवम् बुद्धिजीवियों की उपस्थिति में किया गया। समारोह का आयोजन हिन्दी भाषा समेत तमाम भारतीय भाषाओं में हाइकु कविता को आन्दोलन का रूप देने वाले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व जापानी प्रोफेसर एवम् विभागाध्यक्ष डॉ० सत्यभूषण वर्मा के ७५वें जन्म दिन (जन्म ०४ दिसम्बर १९३२ ई०) के उपलक्ष्य में किया गया। प्रो० वर्मा का १३ जनवरी, २००५ को स्वर्गवास हो गया था। प्रो० सत्यभूषण वर्मा के जन्मदिन को हाइकु दिवस के रूप में मनाए जाने की पहल के अधीन यह सर्वप्रथम आयोजन था।
हाइकु दिवस समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात कथाकार से० रा० यात्री ने की तथा संचालन ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग ने किया। कार्यक्रम के संयोजक कमलेश भट्ट कमल ने हाइकु कविता के शिल्प और उसके इतिहास तथा सौन्दर्य बोध व हिन्दी में उसके व्यापक परिदृश्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कवि एवम् वृत्तचित्र निर्माता-निर्देशक नरेन्द्र तोमर ने हाइकु की संक्षिप्तता को, चीजों को छोटा बनाकर खूबसूरती के साथ प्रस्तुत कर देने की जापानियों की कला से जोड़कर देखा तथा इस सन्दर्भ में बोनसाई की विशेष रूप से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जापानियों के जीवन में जो जबर्दस्त अनुशासन है उसका प्रभाव उनकी कलाओं में भी दिखाई देता है।
कार्यक्रम में बोलते हुए सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ० कुंअर बैचेन ने कहा कि जैसे दोहा और श्लोक स्वतंत्र और पूर्ण रचनाएं हैं, वैसे ही हाइकु भी अपने आप में पूर्ण व स्वतंत्र विधा है। उन्होंने जापान से आई इस १७-अक्षरी हाइकु कविता को अन्तर्राष्ट्रीय विधा बताते हुए महाकवि बाशो द्वारा इस क्षेत्र में अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य किए जाने का उल्लेख किया।
अपने अध्यक्षीय भाषण में कथाकार से० रा० यात्री ने कहा कि हमारे साहित्य में विशेषकर प्राचीन साहित्य में सूत्र के माध्यम से बहुत सारी बातें कह दी जाती थीं। ऐसा लगता है कि उसी सूत्रात्मकता को जापानियों ने अपने ढंग से कविता के रूप में ढाल दिया। हाइकु किसी बड़ी रचना को कम्प्यूटर की मेमोरी चिप की तरह सुरक्षित कर लेने का भी ढंग है। समारोह में डॉ० अंजु सुमन, डॉ० कुंअर बेचैन, कमलेश भट्ट कमल, ओम प्रकाश चतुर्वेदी 'पराग`, कुसुम अग्रवाल, नेहा बैद, पुष्पा रघु आदि ने अपनी हाइकु कविताएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें श्रोताओं ने खुले मन से सराहा।
कार्यक्रम में साहित्यकार एवम् बिल्डर बी० एल० गौड़, उद्योगपति संजय बिन्दल, लघुकथाकार कालीचरण प्रेमी, संगीतकार डॉ० विमला गुप्ता, साहित्यिक संस्था 'गीताभ` के सदस्य राम नारायण मिश्र, राम स्वरूप भास्कर, कृष्ण मित्र, व्यापार कर अध्किारी राजनाथ तिवारी तथा प्रबन्ध्क ओ० पी० पुरोहित आदि के साथ-साथ गान्धर्व महाविद्यालय के रंगकर्मियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।
प्रस्तुति-
अनुराधा भट्ट
के०एल०-१५४, कवि नगर,
गाजियाबाद-२०१ ००२
उत्तर प्रदेश
रायबरेली में हाइकु दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता शम्भूशरण द्विवेदी बंधु ने की तथा कार्यक्रम का संचालन राजेन्द्र बहादुर सिंह 'राजन` ने किया। इस अवसर पर हाइकु कविता के विविध आयामों के लिए डा० सत्यभूषण वर्मा के योगदान की विशेष रूप से वक्ताओं ने चर्चा की। हाइकु दिवस पर जवाहर इन्दु, जय चक्रवर्ती, रामनिवास पंथी, रामनारायण रमण ने अपनी हाइकु कविताओं का पाठ किया।
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Sunday, May 01, 2011
हाइकु-2009 का लोकार्पण
हाइकु-१९८९ और हाइकु-१९९९ के बाद हाइकु का तीसरा ऐतिहासिक संकलन "हाइकु-२००९" का लोकार्पण इनमेनटेक संस्था के सभागार में गीताभ संस्था के वार्षिक समारोह में हुआ। समारोह की अध्यक्षता हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा० शेरजंग गर्ग ने की, मुख्य अतिथि थे प्रसिद्ध नवगीतकार यश मालवीय, विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा० वेदप्रकाश अमिताभ थे। मंच पर सुप्रसिद्ध कहानीकार से०रा०यात्री, बी०एल०गौड़, ओमप्रकाश चतुर्वेदी पराग तथा कमलेश भट्ट कमल भी उपस्थित थे। लगभग २०० श्रोताओं से खचाखच भरे सभागार में साहित्यकार गिरीश पाण्डे आयकर आयुक्त चेन्नई, प्रसिद्ध गीतकार देवेन्द्र शर्मा इन्द्र, इन्दिरा मोहन, डा० कुँअर बेचैन, ओोमप्रकाश यती, ब्रजकिशोर वर्मा "शैदी", डा० सुरेन्द्र सिंघल(सहारनपुर), कृष्ण शलभ(सहारनपुर), डा० वीरेन्द्र आजम(सहारनपुर), आजकल के सम्पादक डा० योगेन्द्र शर्मा, कृष्ण मित्र, डा० सोमदत्त शर्मा, डा० पंकज परिमल, डा० मधु भारती, डा० अंजू सुमन, प्रताप नारायण सिंह सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित थे।
दीप प्रज्ज्वलन के उपरान्त गान्धर्व महाविद्यालय की छात्राओं ने वन्दना प्रस्तुत की। सरस्वती वंदना कवयित्री अंजू जैन ने सुमधुर कंठ से प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। हाइकु-२००९ का लोकार्पण समारोह के अध्यक्ष एवं मंचस्थ साहित्यकारों ने किया। कार्यक्रम का संचालन कमलेश भट्ट कमल ने किया। लोकार्पण के उपरान्त डा० जगदीश व्योम ने हाइकु-२००९ पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संकलन में ०४ जनवरी १९२५ से लेकर ०४ जुलाई १९८२ तक के कुल ५७ वर्षों के समाहित किया गया है। संकलन के प्रथम हाइकुकार पद्मश्री गोपालदास नीरज और अन्तिम हाइकुकार हैं नवल बहुगुणा। संकलन में ६० हाइकुकारों की ७ - ७ हाइकु कविताओं को सम्मिलित किया गया है। पाँच प्रवासी भारतीय भी संकलन में शामिल हैं।
कुछ चुने हुए हाइकु भी डा० व्योम ने संकलन से पढ़कर प्रस्तुत किए-
जन्म मरण
समय की गति के
हैं दो चरण।
-गोपालदास नीरज
वंश जो फैला
हो गए पराए से
माता व पिता।
-महेशचन्द्र सोती
सूखा पत्ता भी
छोड़ना नहीं चाहे
खजूर देह।
-डा शिवबहादुर सिंह भदौरिया
किस दर्जी ने
सिला नीला घाघरा
सितारे टाँक।
-भास्कर तैलंग
घाटी की गूँज
दिशा दिशा घूम के
थकी लौटी।
-डा० बल्देव वंशी
जीने न देते
दण्डकारण्य में भी
सोने के मृग।
-श्रीकष्णकुमार त्रिवेदी
जल चढ़ाया
तो सूर्य ने लौटाए
घने बादल।
-डा० कुँअर बेचैन
पुकारा तुम्हें
सिर्फ आवाज लौटी
तुम न आए।
-कृष्ण शलभ
अँधेरी रात
तारे कीलें ठोंकते
उजियारे की।
-सदाशिव कौतुक
कोमा में गया
फिर जगा ही नहीं
मेरा जमीर।
-आर०पी०शुक्ल
टेबुल पर
पड़ी खुली किताब
पढ़ती हवा।
-ज्ञानेन्द्रपति
तितली व्यस्त
बदल नहीं पाई
होली के वस्त्र।
-सन्तोष कुमार सिंह
कोई सामान
बढ़ा जब घर में
हम सिमटे।
-गिरीश पाण्डे
की बगावत
नींव के पत्थरों ने
ढहे महल।
-लक्ष्मीशंकर वाजपेयी
गर्म हवाएँ
खुली सड़क पर
बीन बजाएँ।
-पूर्णिमा वर्मन
बूँदें ओस की
नहीं मरीं षूप से
वक्त से मरीं।
-डा० वीरेन्द्र आजम
गरजे मेघ
कानाफूसी करते
ऊँचे शीशम।
-रजनी भार्गव
सुबह हुई
उड़ चली नभ में
सिन्दूरी रुई।
-सितांशु कुमार
वही है बुद्ध
जीत लिया जिसने
जीवन-युद्ध ।
-त्रिलोक सिंह ठकुरेला
आँसू पोंछने
तैयार मिले लोग
निज शर्तों पर।
-सुजाता शिवेन
देखो तो सही
पत्तों का गिरना
पेड़ का जीना।
-रमाकान्त
उग आई है
रिश्तों में नागफनी
गाँव शहर।
-रमेशकुमार सोनी
बँधेगा जब
कुहरा गठरी में
हँसेगी धूप।
-डा० अंजू सुमन
कैद करती
इन्द्रधनुषी रंग
हठीली ओस।
-अंशु सिंह
दुल्हन झील
तारों की चूनर से
घूँघट काढ़े।
-डा० भावना कुँअर
रूई के फाहे
बादलों पर छाए
वृक्ष नहाए।
-अर्बुदा ओहरी
निर्झर धारा
काई का उबटन
प्रकृति वधू।
-स्वाती भालोटिया
डिम्ब फोड़ के
गहन तिमिर का
चहकी भोर।
-नवल किशोर बहुगुणा
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-प्रस्तुति
डा० जगदीश व्योम
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